"सकारात्मक सोच से असंभव भी संभव बन जाता है" — आचार्य श्री 108 सुनीलसागर जी महाराज
झाबुआ (म.प्र.), 28 जून 2026।
(संवाददाता मुकेश कुमार जैन )परम पूज्य प्राकृताचार्य, राष्ट्र गौरव एवं चतुर्थ पट्टाधीश आचार्य श्री 108 सुनीलसागर जी महाराज ने अपने प्रेरणादायी प्रवचन में कहा कि मनुष्य के जीवन की दिशा और दशा उसकी सोच से निर्धारित होती है। यदि विचार सकारात्मक हों, संकल्प दृढ़ हो और आत्मविश्वास बना रहे, तो कोई भी लक्ष्य कठिन नहीं रहता।
आचार्य श्री ने कहा कि जीवन में आने वाली बाधाओं से घबराने के बजाय मन को सकारात्मक बनाए रखना चाहिए। नकारात्मक सोच व्यक्ति की शक्ति को कमजोर करती है, जबकि सकारात्मक सोच आत्मबल बढ़ाकर सफलता के मार्ग प्रशस्त करती है। जो व्यक्ति हर परिस्थिति में अवसर खोजता है, वही जीवन में आगे बढ़ता है।
अपने हाल ही में राणापुर से झाबुआ तक हुए लगभग 20 किलोमीटर के पदविहार का उल्लेख करते हुए गुरुदेव ने कहा कि यदि वे दूरी, भीषण गर्मी, कठिन मार्ग और स्वास्थ्य की चिंता में उलझ जाते, तो यात्रा पूरी करना कठिन हो सकता था। लेकिन सकारात्मक सोच, आत्मविश्वास और प्रभु पर अटूट विश्वास के साथ उन्होंने संकल्प लिया कि विहार अवश्य सफल होगा, और वही हुआ।उन्होंने कहा कि जीवन में सफलता केवल शारीरिक सामर्थ्य से नहीं, बल्कि मानसिक दृढ़ता और सकारात्मक दृष्टिकोण से प्राप्त होती है। जो व्यक्ति ईश्वर पर विश्वास, स्वयं पर भरोसा और श्रेष्ठ विचारों को अपनाता है, उसके लिए कठिनाइयाँ भी सफलता की सीढ़ी बन जाती हैं।
आचार्य श्री ने निराशा, भय, आलस्य और नकारात्मकता को मनुष्य का सबसे बड़ा शत्रु बताते हुए कहा कि उत्साह, विश्वास, संयम और सकारात्मक सोच को अपनाने से जीवन में शांति, आनंद और सफलता स्वतः प्राप्त होने लगती है। विचार बदलते हैं तो व्यवहार बदलता है, और व्यवहार बदलने से पूरा जीवन बदल जाता है।प्रवचन के अंत में आचार्य श्री ने श्रद्धालुओं से आह्वान किया कि परिस्थितियाँ चाहे जैसी भी हों, आशा और सकारात्मक सोच का साथ कभी न छोड़ें। जो व्यक्ति निरंतर अच्छे विचारों के साथ प्रयास करता है, सफलता अंततः उसी के चरण चूमती है।
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