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रुद्रपुर में 'मंदिर कब्जा' विवाद ने पकड़ा तूल, ग्रामीण बोले– प्रधान प्रतिनिधि पर लगाए गए आरोप बेबुनियाद

ग्रामीणों ने डीएम से निष्पक्ष जांच की मांग की, झूठे आरोप लगाने वालों पर कार्रवाई की उठाई मांग

जिला संवाददाता : विकास मिश्रा
सकरन/सीतापुर। थाना सकरन क्षेत्र के ग्राम रुद्रपुर में प्रधान प्रतिनिधि उपेंद्र सिंह पर लगाए गए "किन्नर समाज के मंदिर पर कब्जा" तथा "मंदिर परिसर में नशीले पदार्थों की बिक्री" के आरोपों को लेकर नया विवाद खड़ा हो गया है। गांव के बड़ी संख्या में ग्रामीणों ने इन आरोपों को पूरी तरह निराधार बताते हुए जिलाधिकारी से निष्पक्ष जांच कराने और झूठे आरोप लगाने वालों के विरुद्ध कठोर कार्रवाई की मांग की है।

ग्रामीणों का कहना है कि ग्राम रुद्रपुर के मध्य स्थित भगवान शिव का मंदिर वर्षों पुराना धार्मिक स्थल है। लगभग 17 वर्ष पूर्व मंदिर की मूर्तियां खंडित हो गई थीं, जिसके बाद लंबे समय तक मंदिर की उचित देखरेख नहीं हो सकी। ग्रामीणों के अनुसार ग्राम प्रधान ऊषा सिंह के कार्यकाल में मंदिर का पुनर्जीवन कराया गया। नई मूर्तियों की प्राण-प्रतिष्ठा के साथ मंदिर का सुंदरीकरण, चबूतरे का निर्माण, रामायण शेड, पुराने कुएं की मरम्मत तथा विधायक निधि (एमएलसी कोटा) से हाईमास्ट लाइट की स्थापना कराई गई।

हाल ही में कुछ लोगों द्वारा प्रधान प्रतिनिधि उपेंद्र सिंह पर मंदिर पर कब्जा करने तथा मंदिर परिसर में नशीले पदार्थों की बिक्री कराने जैसे गंभीर आरोप लगाए गए। इन आरोपों के बाद गांव के लोगों ने खुलकर प्रधान प्रतिनिधि के समर्थन में सामने आते हुए कहा कि गांव में किन्नर समाज का कोई परिवार निवास ही नहीं करता, इसलिए "किन्नर समाज के मंदिर पर कब्जा" का दावा पूरी तरह तथ्यहीन और भ्रामक है। ग्रामीणों के मुताबिक मंदिर का निर्माण भी क्षत्रिय समाज के लोगों द्वारा कराया गया था और आज भी उसकी देखरेख गांव के लोग मिलकर करते हैं।

मंदिर के समीप दुकान संचालित करने वाले जैनेंद्र सिंह ने भी आरोपों का खंडन करते हुए कहा कि मंदिर परिसर में किसी प्रकार की नशीले पदार्थों की बिक्री नहीं होती और इस तरह के आरोप गांव का माहौल खराब करने के उद्देश्य से लगाए जा रहे हैं।

वहीं प्रधान प्रतिनिधि उपेंद्र सिंह ने अपने ऊपर लगे सभी आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए कहा कि भगवान शिव का मंदिर पूरे गांव की आस्था का केंद्र है। उन्होंने मंदिर पर किसी प्रकार का अवैध कब्जा नहीं किया है। उन्होंने बताया कि पिछले पांच वर्षों में गांव में सड़क, नाली, चकमार्ग, मंदिरों के सौंदर्यीकरण सहित कई विकास कार्य कराए गए हैं, जिन्हें कुछ लोग राजनीतिक द्वेष के चलते बदनाम करने का प्रयास कर रहे हैं।

ग्रामीणों ने जिलाधिकारी को प्रार्थना पत्र सौंपकर पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने, सत्य सामने लाने तथा झूठे और भ्रामक आरोप लगाने वालों के खिलाफ विधिसम्मत कार्रवाई किए जाने की मांग की है।

(नोट: यह समाचार संबंधित पक्षों के दावों और ग्रामीणों द्वारा दिए गए बयानों पर आधारित है। मामले की सत्यता का अंतिम निर्धारण सक्षम प्रशासनिक जांच के बाद ही होगा।)

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