पांच दिनों तक बहती रही श्रद्धा, भक्ति और सनातन संस्कृति की अविरल धारा
जिला संवाददाता विकास मिश्रा
बिसवां/सीतापुर।
मानपुर क्षेत्र के जुड़ईपुर गांव में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा का शुक्रवार को पूर्णाहुति एवं विशाल भंडारे के साथ श्रद्धा और भक्ति पूर्ण माहौल में समापन हो गया। पांच दिनों तक चले इस आध्यात्मिक आयोजन में गांव सहित दूर-दराज क्षेत्रों से पहुंचे श्रद्धालु कथा रस में डूबे नजर आए। पूरे गांव में शंखध्वनि, वैदिक मंत्रोच्चारण और हरिनाम संकीर्तन से वातावरण भक्तिमय बना रहा।
कथा के अंतिम दिवस कथा आचार्य अनुरुद्धाचार्य महाराज ने भगवान श्रीकृष्ण की दिव्य लीलाओं, सुदामा चरित्र, उद्धव प्रसंग एवं धर्म की महत्ता का मार्मिक वर्णन किया। कथा श्रवण करते हुए श्रद्धालु कई बार भावविभोर हो उठे। उनके सहयोगी सौरभ कृष्ण शास्त्री एवं कृष्णा पाण्डेय ने भी भक्ति रस से ओतप्रोत प्रवचनों के माध्यम से श्रद्धालुओं को आध्यात्मिक संदेश दिए।
कथा व्यास ने कहा कि श्रीमद्भागवत केवल धार्मिक ग्रंथ नहीं, बल्कि मानव जीवन को सद्मार्ग पर ले जाने वाली दिव्य चेतना है। भगवान श्रीकृष्ण और सुदामा की मित्रता का प्रसंग सुनाते हुए उन्होंने प्रेम, त्याग, समर्पण और सच्चे संबंधों की महत्ता पर प्रकाश डाला।
कथा पंडाल में भजन-कीर्तन और “जय श्रीकृष्ण” के जयकारों से माहौल गूंज उठा। महिलाओं ने मंगलगीत प्रस्तुत कर आयोजन में भक्ति का रंग घोल दिया। श्रद्धालुओं ने आरती उतारकर परिवार एवं समाज में सुख-समृद्धि की कामना की। आकर्षक सजावट और आध्यात्मिक वातावरण ने आयोजन को अलौकिक स्वरूप प्रदान किया।
समापन अवसर पर वैदिक रीति-विधान के साथ हवन-पूजन एवं पूर्णाहुति संपन्न कराई गई। इसके उपरांत आयोजित विशाल भंडारे में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने प्रसाद ग्रहण कर पुण्य लाभ अर्जित किया। कार्यक्रम की व्यवस्थाओं में गांव के युवाओं की सक्रिय भूमिका सराहनीय रही।
कार्यक्रम के यजमान जगदीश त्रिपाठी रहे। इस अवसर पर अम्बिका प्रसाद त्रिपाठी, विवेक त्रिपाठी, नवल किशोर, राम औतार मिश्रा, प्रवीण, सुशील सहित बड़ी संख्या में क्षेत्रवासी एवं श्रद्धालु उपस्थित रहे।
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