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सिधौली में गूंजा 'शब्द' और 'समय' का संवाद: "जब जनता खामोश होगी, तब तानाशाही बढ़ेगी

जिला संवाददाता विकास मिश्रा
सीतापुर (सिधौली)। जनपद के सिधौली की धरती पर साहित्य, पत्रकारिता और राजनीति का एक अनोखा संगम देखने को मिला। अवसर था 'शब्द और समय' संवाद के अंतर्गत "वर्तमान चुनौतियां और लेखकों, मीडिया की भूमिका" विषय पर आयोजित जन-बुद्धिजीवी सम्मेलन का। कांग्रेस के सांस्कृतिक प्रकोष्ठ द्वारा सुनीला रावत की पहल पर आयोजित इस गरिमामय कार्यक्रम का उद्घाटन मुख्य अतिथि सांसद राकेश राठौर ने किया।

सम्मान: कलम के प्रहरियों का वंदन

सम्मेलन के दौरान साहित्य और पत्रकारिता में विशिष्ट योगदान के लिए विभूतियों को सम्मानित किया गया:
भाषाविद डॉ. सुन्दर लाल राठौर सम्मान-2026: चर्चित मीडिया यू-ट्यूबर चन्द्रशेखर प्रजापति को प्रदान किया गया।

जनकवि बलभद्र दीक्षित 'पढ़ीस' सम्मान-2026: प्रख्यात लेखिका डॉ. ज्ञानवती दीक्षित को दिया गया।

सांसद राकेश राठौर का आह्वान: "सिंहासन के सामने सच बोलना ही धर्म"

सांसद राकेश राठौर ने अपने संबोधन में तीखे प्रहार करते हुए कहा कि यह सम्मेलन केवल कवियों या पत्रकारों का जमावड़ा नहीं है, बल्कि यह लोकतंत्र और संविधान की 'अंतिम चौकी' पर खड़े योद्धाओं की सभा है। उन्होंने जोर देकर कहा:
"आज बेरोजगारी और महंगाई से भी बड़ा संकट समाज की चेतना पर कब्जा करने का है। जब सच बोलना अपराध और सवाल पूछना देशद्रोह मान लिया जाए, तब जनता को अपनी खामोशी तोड़नी होगी। याद रखिए, जनता की चुप्पी ही तानाशाही का खाद-पानी है।"

बुद्धिजीवियों के विचार: "तटस्थता अन्याय की शरणस्थली"

सम्मेलन में वक्ताओं ने वर्तमान सामाजिक-राजनैतिक परिवेश पर बेबाकी से अपनी राय रखी:
अमृता (लेखिका): "सत्ता झूठ को राष्ट्रवाद और नफरत को संस्कृति बता रही है। जो कलम सवाल पूछती है, उसे कुचलने की साजिश हो रही है। 'शब्द और समय' का यह संवाद अब पूरे प्रदेश में फैलना चाहिए।"
अरुण अवध (अध्यक्ष/लेखक): "जन-बुद्धिजीवी होना केवल किताबें लिखना नहीं, बल्कि संविधान पर हमले के वक्त प्रहरी बनकर खड़ा होना है।"

शिवप्रकाश सिंह (किसान नेता): "जब किसान, नौजवान और महिलाएं असुरक्षित हों, तब बुद्धिजीवी की चुप्पी इतिहास में अपराध मानी जाएगी। यह समय तटस्थ रहने का नहीं है।"
कार्तिकेय शुक्ल (संचालक): "इतिहास गवाह है कि जब-जब सत्ता निरंकुश हुई है, कविता प्रतिरोध बनी है और पत्रकारिता जनता की सांस।"

प्रमुख उपस्थित और संकल्प

कार्यक्रम में राहुल सिंह ने 'जन-पत्रकारिता' को गांव-गांव तक ले जाने की बात कही, वहीं दीन मोहम्मद रिजवी ने कहा कि सांसद राकेश राठौर अक्सर अपने प्रतिरोध से सिद्ध करते हैं कि नेता का काम सिर्फ महफिल सजाना नहीं, बल्कि सच बोलना है। अजीज अहमद गौरी ने कविता को 'इंसानियत का घोषणापत्र' बनाने की अपील की।

अंत में अनुप्रिया वर्मा ने संकल्प दिलाया कि कलम और आवाज को सत्ता की चौखट पर गिरवी नहीं रखा जाएगा। आयोजक सुनीला रावत ने डॉ. सुन्दर लाल राठौर और जनकवि 'पढ़ीस' को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए भविष्य में भी ऐसे वैचारिक आयोजनों को जारी रखने का संकल्प लिया।

संवाद का सार: यह कार्यक्रम सत्ता के सामने सिर उठाकर सवाल पूछने और टूटते हुए लोकतांत्रिक मूल्यों को शब्दों के जरिए जोड़ने की एक सशक्त मुहिम के रूप में उभरा।

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