बालेश्वर महादेव धाम के पास संचालित इकाई पर धार्मिक भावनाएं, पर्यावरण और जनस्वास्थ्य प्रभावित होने के आरोप; ग्रामीणों ने निष्पक्ष जांच और कार्रवाई की मांग उठाई।
जिला संवाददाता: विकास मिश्रा
अटरिया/सीतापुर। गोमती नदी के पावन तट पर स्थित प्राचीन श्री बालेश्वर महादेव धाम के निकट संचालित अंडा उत्पादन एवं मुर्गीपालन इकाई को लेकर ग्रामीणों और श्रद्धालुओं में नाराजगी बढ़ती जा रही है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि इकाई से फैलने वाली दुर्गंध के कारण मंदिर आने वाले श्रद्धालुओं की धार्मिक भावनाएं आहत हो रही हैं, वहीं आसपास का वातावरण और जनस्वास्थ्य भी प्रभावित हो रहा है।
ग्रामीणों का कहना है कि प्रदेश सरकार धार्मिक स्थलों के संरक्षण और सनातन संस्कृति के संवर्धन की बात करती है, लेकिन शिवधाम के आसपास कथित रूप से फैल रही दुर्गंध और प्रदूषण की शिकायतों पर जिम्मेदार विभागों की चुप्पी कई सवाल खड़े करती है।
शिकायतों के बावजूद कार्रवाई नहीं
स्थानीय लोगों का आरोप है कि प्रशासन, स्वास्थ्य विभाग और अन्य संबंधित अधिकारियों से कई बार शिकायत की गई, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। ग्रामीणों ने मांग की है कि मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाए और यदि किसी प्रकार का नियम उल्लंघन पाया जाए तो नियमानुसार कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।
स्वास्थ्य और पर्यावरण पर भी चिंता
ग्रामीणों का कहना है कि यदि अपशिष्ट प्रबंधन और स्वच्छता मानकों का सही ढंग से पालन नहीं हो रहा है तो इससे पर्यावरण और जनस्वास्थ्य दोनों पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है। लोगों ने स्वास्थ्य विभाग से क्षेत्र का निरीक्षण कर वस्तुस्थिति स्पष्ट करने की मांग की है।
धार्मिक आस्था का भी मुद्दा
गोमती तट पर स्थित प्राचीन श्री बालेश्वर महादेव धाम क्षेत्र की प्रमुख आस्था का केंद्र है। सावन, महाशिवरात्रि सहित विभिन्न धार्मिक अवसरों पर यहां बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं। श्रद्धालुओं का कहना है कि मंदिर परिसर और मार्ग पर यदि दुर्गंध या अस्वच्छता हो तो धार्मिक अनुभव प्रभावित होना स्वाभाविक है।
ग्रामीणों की प्रमुख मांगें
• धार्मिक स्थल के आसपास पर्यावरणीय मानकों की निष्पक्ष जांच।
• दुर्गंध और प्रदूषण संबंधी शिकायतों का सत्यापन।
• स्वास्थ्य विभाग द्वारा जनस्वास्थ्य पर प्रभाव का परीक्षण।
• श्रद्धालुओं और स्थानीय निवासियों के हितों की सुरक्षा।
• नियमों का उल्लंघन मिलने पर नियमानुसार कार्रवाई।
नोट: इस समाचार में वर्णित आरोप स्थानीय ग्रामीणों और श्रद्धालुओं द्वारा लगाए गए हैं। इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। संबंधित मुर्गीपालन इकाई, स्वास्थ्य विभाग, पुलिस एवं प्रशासन का पक्ष प्राप्त होने पर उसे भी समान प्रमुखता से प्रकाशित किया जाएगा।
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