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कमीशन के आरोपों के बीच मनरेगा भुगतान पर बड़ा बवाल: करोड़ों का भुगतान रिजेक्ट, प्रधान और सप्लायर ब्लॉक के चक्कर लगाने को मजबूर

जिला संवाददाता : विकास मिश्रा
सांडा/सकरन (सीतापुर)। विकास खंड सकरन में मनरेगा के वर्ष 2024-25 के मैटेरियल एवं मजदूरी भुगतान को लेकर बड़ा विवाद सामने आया है। ग्राम प्रधानों और सप्लायरों ने आरोप लगाया है कि भुगतान से पहले उनसे कमीशन के नाम पर मोटी रकम वसूली गई, लेकिन इसके बावजूद उनका बकाया भुगतान नहीं हो सका। अब भुगतान रिजेक्ट होने के बाद वे लगातार ब्लॉक कार्यालय के चक्कर लगाने को मजबूर हैं।

जानकारी के अनुसार, वर्ष 2024-25 के मनरेगा कार्यों का लगभग 3 करोड़ 39 लाख रुपये का बकाया भुगतान 18 जून को जारी हुआ था। आरोप है कि मनरेगा सेल में भुगतान प्रक्रिया के दौरान कुल 44 एफटीओ (Fund Transfer Orders) के माध्यम से करीब 3 करोड़ 61 लाख रुपये का भुगतान कर दिया गया, जिससे लगभग 22 लाख रुपये का अतिरिक्त भुगतान दर्ज हो गया। इसके बाद भुगतान प्रक्रिया में तकनीकी एवं प्रशासनिक स्तर पर गड़बड़ी सामने आने की बात कही जा रही है।

प्रधानों का कहना है कि 1 जुलाई तक सभी ग्राम पंचायतों का भुगतान पोर्टल पर "SO" स्थिति में दिखाई देता रहा, लेकिन 1 जुलाई को अचानक सभी भुगतान रिजेक्ट कर दिए गए। उनका आरोप है कि मनरेगा सेल में नियुक्त कंप्यूटर ऑपरेटर के स्थान पर एक रोजगार सेवक से भुगतान संबंधी कार्य कराया गया, जिसके कारण वर्ष 2024-25 के साथ-साथ वर्ष 2023-24 के बकाया भुगतान भी प्रक्रिया में शामिल हो गए और पूरी भुगतान व्यवस्था प्रभावित हो गई।

प्रधान संघ अध्यक्ष सुंदरलाल तिवारी ने बताया कि भुगतान प्रक्रिया में अनियमितताओं को लेकर 19 जून को एडीओ पंचायत को ज्ञापन भी सौंपा गया था, लेकिन शिकायत पर प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई। उन्होंने आरोप लगाया कि कई प्रधानों और सप्लायरों से भुगतान कराने के नाम पर पहले ही कमीशन लिया गया, लेकिन अब तक भुगतान नहीं हो पाया है। प्रधान ब्रजेश, जलीश, राहुल सहित अन्य जनप्रतिनिधियों ने भी शीघ्र भुगतान कराने और पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की है।

इस संबंध में एपीओ विकास श्रीवास्तव ने बताया कि भुगतान एडमिन लॉगिन से रिजेक्ट हुआ है। उन्होंने कहा कि दोबारा भुगतान की प्रक्रिया शुरू कराने के लिए डीडीओ को पत्र भेज दिया गया है और आवश्यक कार्रवाई की जा रही है।

अब सवाल यह है कि यदि भुगतान प्रक्रिया में वास्तव में अनियमितता हुई है तो इसकी जिम्मेदारी किसकी तय होगी, और जिन प्रधानों एवं सप्लायरों का भुगतान महीनों से लंबित है, उन्हें राहत आखिर कब मिलेगी। मामले ने पूरे विकास खंड में चर्चा का विषय बना हुआ है।

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