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झगरपुर पंचायत में लाखों का घोटाला! सचिव पर गबन का आरोप, 3 दिन में पैसे लौटाने का नोटिस



लैलूंगा/रायगढ़। धर्मेंद्र महंत।
छत्तीसगढ़ में ग्रामीण विकास के नाम पर सरकार भले ही करोड़ों रुपये खर्च कर रही हो, लेकिन कई पंचायतों में भ्रष्टाचार की जड़ें इतनी गहरी हो चुकी हैं कि विकास योजनाएं कागजों तक ही सीमित रह गई हैं। ताजा मामला जनपद पंचायत लैलूंगा के ग्राम पंचायत झगरपुर से सामने आया है, जहां पंचायत सचिव पर लाखों रुपये के फर्जी आहरण और गबन का गंभीर आरोप लगा है।

ग्रामीणों और पूर्व सरपंच भारती राठिया ने आरोप लगाया है कि गांव में पेयजल की भारी समस्या होने के बावजूद हैंडपंप सह मोटर स्थापना और बड़े तालाब में पछरी निर्माण के नाम पर लाखों रुपये की राशि निकाल ली गई, लेकिन जमीनी हकीकत में कोई काम दिखाई नहीं देता। भीषण गर्मी के बीच गांव के लोग आज भी पानी के लिए दर-दर भटकने को मजबूर हैं।

ग्रामीणों की शिकायत के बाद जनपद पंचायत लैलूंगा के मुख्य कार्यपालन अधिकारी ने मामले को गंभीरता से लेते हुए जांच के आदेश दिए। जांच टीम जब ग्राम पंचायत झगरपुर पहुंची तो शिकायत सही पाई गई। इसके बाद जांच रिपोर्ट जिला पंचायत को भेजी गई, जहां से जिला सीईओ ने तत्काल कार्रवाई के निर्देश जारी किए।

मामले में अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व) लैलूंगा ने पंचायत सचिव मनकेश्वर राठिया को 2 लाख 67 हजार 850 रुपये जमा करने का नोटिस जारी किया है। साथ ही चेतावनी दी गई है कि यदि 3 दिनों के भीतर संतोषजनक जवाब नहीं दिया गया तो पंचायत राज अधिनियम 1993 की धारा 92 के तहत गबन की राशि की वसूली और अन्य सख्त कार्रवाई की जाएगी।

अब सवाल यह उठता है कि जब गांव में पानी की समस्या आज भी जस की तस है, तो आखिर विकास के नाम पर निकाली गई लाखों की राशि गई कहां? ग्रामीणों का कहना है कि यदि जल्द सख्त कार्रवाई नहीं हुई तो वे बड़े आंदोलन के लिए मजबूर होंगे।

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