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आपूर्ति में कृत्रिम कमी बनाकर गुटखा की कालाबाजारी, एमआरपी से अधिक दाम वसूले जा रहे

ब्रेकिंग न्यूज़ | चित्रकूट


विक्रम कुमार || चित्रकूट जनपद में इन दिनों गुटखा की आपूर्ति में कथित कमी का फायदा उठाकर खुलेआम कालाबाजारी किए जाने का मामला सामने आ रहा है। शहर से लेकर ग्रामीण क्षेत्रों तक कई दुकानदार 5 और 15 रुपये की एमआरपी वाली पुड़िया 7 से 20 रुपये तक में बेच रहे हैं। उपभोक्ताओं का आरोप है कि दुकानदार “माल कम है” कहकर अधिक कीमत वसूल रहे हैं और विरोध करने पर सामान देने से भी मना कर देते हैं।

स्थानीय लोगों के अनुसार पिछले कुछ दिनों से बाजार में गुटखा की सप्लाई कम बताई जा रही है। इसी का फायदा उठाकर खुदरा दुकानदार मनमाने दाम वसूल रहे हैं। कई ग्राहकों ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि यदि वे निर्धारित मूल्य देने की बात करते हैं तो दुकानदार साफ कह देते हैं कि “लेना हो तो लो, वरना छोड़ दो, माल की भारी कमी है।”

सूत्रों की मानें तो इस पूरे खेल में कुछ थोक विक्रेताओं की भूमिका भी संदिग्ध बताई जा रही है। आरोप है कि जानबूझकर सप्लाई सीमित कर कृत्रिम कमी पैदा की जा रही है, जिससे बाजार में मांग बढ़े और खुदरा स्तर पर अधिक दाम वसूले जा सकें। थोक स्तर पर भी खुदरा दुकानदारों से अतिरिक्त रकम वसूले जाने की चर्चा है। इससे खुदरा व्यापारी भी बढ़ी कीमत पर माल खरीदने को मजबूर हो रहे हैं और बाद में वही बोझ ग्राहकों पर डाला जा रहा है।

ग्रामीण क्षेत्रों में स्थिति और भी गंभीर बताई जा रही है। वहां निगरानी तंत्र कमजोर होने के कारण दुकानदार बिना किसी डर के एमआरपी से अधिक कीमत वसूल रहे हैं। उपभोक्ता ठगा महसूस कर रहे हैं, लेकिन शिकायत करने से कतरा रहे हैं। कई लोगों का कहना है कि छोटी-छोटी चीजों के लिए प्रशासनिक दफ्तरों के चक्कर लगाना उनके लिए संभव नहीं है, इसलिए वे मजबूरी में अधिक कीमत चुकाने को तैयार हो जाते हैं।

कानून के अनुसार किसी भी उत्पाद को उसकी अधिकतम खुदरा मूल्य (एमआरपी) से अधिक कीमत पर बेचना दंडनीय अपराध है। इसके बावजूद संबंधित विभागों की ओर से अब तक कोई ठोस कार्रवाई सामने नहीं आई है। बाजार में चर्चा है कि यदि समय रहते सख्त कदम नहीं उठाए गए तो कालाबाजारी का यह खेल और तेज हो सकता है।

स्थानीय सामाजिक संगठनों और जागरूक नागरिकों ने जिला प्रशासन से मांग की है कि बाजार में औचक निरीक्षण कर एमआरपी से अधिक कीमत वसूलने वाले दुकानदारों और संदिग्ध थोक विक्रेताओं के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाए। साथ ही उपभोक्ताओं से भी अपील की जा रही है कि वे बिल अवश्य लें और अधिक कीमत वसूले जाने पर संबंधित विभाग में शिकायत दर्ज कराएं।

अब देखना यह होगा कि प्रशासन इस मामले को कितनी गंभीरता से लेता है और आम उपभोक्ताओं को राहत दिलाने के लिए क्या कदम उठाए जाते हैं। फिलहाल, गुटखा की कृत्रिम कमी और बढ़ी हुई कीमतों ने जनपद के बाजारों में हलचल मचा दी है।

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